महाजाम ने छीना पुलिस भर्ती का सपना, 5 मिनट की देरी से परीक्षा से वंचित हुई छात्रा
● स्थानीय लोगों और छात्र संगठनों में भारी आक्रोश, लापरवाह अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग
● पीड़ित छात्रा अंशिका के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित कराने की उठने लगी चौतरफा आवाज
हमीरपुर, 10 जून 2026। ClariQ News के अनुसार, यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान एक बेहद भावुक और चिंताजनक मामला सामने आया है। कानपुर निवासी छात्रा अंशिका अग्निहोत्री भीषण ट्रैफिक जाम के कारण परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच सकीं और पुलिस भर्ती परीक्षा देने से वंचित रह गईं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंशिका अपनी मां के साथ बुधवार सुबह लगभग 4:00 बजे कानपुर से हमीरपुर के लिए रवाना हुई थीं। उनका परीक्षा केंद्र राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (GGIC), हमीरपुर में प्रथम पाली (सुबह 10:00 बजे से) निर्धारित था। लेकिन कानपुर-सागर हाईवे (NH-34) पर पतारा और संभुआ क्षेत्र के बीच कई किलोमीटर लंबा महाजाम लग गया, जिससे उनकी यात्रा लगभग 3 से 4 घंटे प्रभावित हुई।
लगातार प्रयासों के बावजूद छात्रा समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सकी और सुबह 10 बजकर 5 मिनट पर केंद्र पहुंची। तब तक परीक्षा केंद्र के गेट बंद हो चुके थे। सुरक्षा कर्मियों ने परीक्षा नियमों का हवाला देते हुए छात्रा को प्रवेश देने से इनकार कर दिया।
मां-बेटी के आंसुओं से पसीज उठा हर दिल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार परीक्षा केंद्र के बाहर छात्रा और उसकी मां भावुक हो गईं। अपनी बेटी का भविष्य प्रभावित होता देख मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। बाद में उन्होंने अधिकारियों से भी गुहार लगाई, लेकिन परीक्षा नियमों की बाध्यता के कारण कोई राहत नहीं मिल सकी।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मां अपनी बेटी के एक वर्ष के परिश्रम के व्यर्थ चले जाने की पीड़ा व्यक्त करती दिखाई दे रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में ट्रैफिक प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों में आक्रोश: जिम्मेदार अधिकारियों पर हो मुकदमा
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों, छात्र संगठनों और सोशल मीडिया पर लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि कानपुर-सागर हाईवे पर लंबे समय से जाम की समस्या बनी हुई है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी प्रयास दिखाई नहीं देते।
बड़ी मांग: आक्रोशित लोगों और छात्र नेताओं ने पुरजोर मांग की है कि परीक्षा के दिन इतने बड़े हाईवे पर सुचारू यातायात व्यवस्था संभालने में नाकाम रहने वाले लापरवाह और जिम्मेदार प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज किया जाए। लोगों का कहना है कि जब सरकार को परीक्षा की तारीखें पहले से पता थीं, तो रूट मैनेजमेंट दुरुस्त क्यों नहीं किया गया? अधिकारियों की इसी लापरवाही के कारण एक होनहार छात्रा का भविष्य दांव पर लग गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आए दिन लगने वाले जाम से आम जनता, मरीजों, विद्यार्थियों और नौकरी-पेशा लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जाती। लोगों का कहना है कि यदि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया गया होता, तो अंशिका जैसी अभ्यर्थी को अपना महत्वपूर्ण अवसर नहीं गंवाना पड़ता।
परीक्षा के आंकड़े
गौरतलब है कि हमीरपुर जिले में यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए कुल 7 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। तीन दिनों तक चली इस भर्ती परीक्षा में जिले में कुल 18,432 अभ्यर्थियों को भाग लेना था, जहां हर पाली में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच परीक्षा कराई जा रही थी। वहीं इस महाजाम और विभिन्न कारणों से अंशिका समेत बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा देने से वंचित या अनुपस्थित रहे।
बड़ा सवाल: क्या पीड़ित छात्रा की परीक्षा दोबारा कराई जाएगी?
एक ओर सरकार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए बड़ी भर्ती परीक्षाएं आयोजित कर रही है, वहीं दूसरी ओर सड़क जाम और लचर प्रशासनिक व्यवस्था जैसी समस्याएं मेहनती अभ्यर्थियों के सपनों पर पानी फेर रही हैं। अंशिका का मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब चौतरफा यह मांग तेज हो गई है कि शासन और पुलिस भर्ती बोर्ड विशेष मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पीड़ित छात्रा अंशिका अग्निहोत्री की परीक्षा विशेष प्रावधान के तहत दोबारा आयोजित कराए, ताकि उसकी साल भर की मेहनत और भविष्य बर्बाद होने से बच सके। इसके साथ ही जनता यह मांग कर रही है कि भविष्य में ऐसी संवेदनशील परीक्षाओं के दौरान अभ्यर्थियों के लिए 'ग्रीन कॉरिडोर' या बेहतर वैकल्पिक यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि फिर किसी और के सपनों की इस तरह बलि न चढ़े।
📍 ClariQ News | Hamirpur Bureau
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